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बायबिट क्या है? फीस, फ़ीचर और भारत में इसकी स्थिति
- कठिनाई
- Beginner
- समय
- 1 मिनट
इस पेज पर
बायबिट एक क्रिप्टो एक्सचेंज है — वह जगह जहाँ आप क्रिप्टोकरेंसी ख़रीदते, बेचते और उसके भाव पर ट्रेड करते हैं। यह पेज बताता है कि इस पर असल में क्या-क्या है, क्या लागत आती है, और भारत से इस्तेमाल करने पर स्थिति क्या बनती है। (यह शैक्षिक जानकारी है, निवेश या टैक्स सलाह नहीं।)
एक नज़र में
- शुरुआत: 2018, संस्थापक बेन झोउ (अब भी CEO)
- इकाई और मुख्यालय: Bybit Fintech Ltd; दुबई, UAE (2022 में सिंगापुर से स्थानांतरित)
- प्रोडक्ट: स्पॉट, परपेचुअल फ्यूचर्स, कॉपी ट्रेडिंग, ग्रिड बॉट, P2P, Earn
- स्पॉट फीस: 0.1% मेकर / 0.1% टेकर (non-VIP)
- फ्यूचर्स फीस: 0.02% मेकर / 0.055% टेकर (USDT परपेचुअल, non-VIP)
- कस्टोडियल: हाँ — प्लेटफ़ॉर्म पर रखे फंड की चाबियाँ एक्सचेंज के पास होती हैं
इस पर क्या-क्या कर सकते हैं
स्पॉट ट्रेडिंग — कॉइन सीधे ख़रीदना और बेचना। ख़रीदा हुआ कॉइन आपका होता है। नुक़सान की ऊपरी सीमा उतनी ही है जितना आपने लगाया।
परपेचुअल फ्यूचर्स — भाव पर कॉन्ट्रैक्ट, बिना कॉइन रखे, अक्सर लीवरेज के साथ। इनकी कोई एक्सपायरी नहीं होती और ये फंडिंग रेट के ज़रिए स्पॉट भाव के पास रहते हैं। यह सबसे जोखिम भरा हिस्सा है — विस्तार से फ्यूचर्स ट्रेडिंग क्या है में।

लीवरेज — पोज़ीशन खोलते समय चुना जाता है। जितना ऊँचा लीवरेज, लिक्विडेशन उतना पास। सीखने के दौर में सबसे कम पर रहना ही समझदारी है।

कॉपी ट्रेडिंग — किसी और ट्रेडर की पोज़ीशन अपने अकाउंट में अपने-आप कॉपी होना। सुविधाजनक ज़रूर है, पर जोखिम ख़त्म नहीं होता — वह बस किसी और के फ़ैसलों पर चला जाता है।

फीस असल में कितनी है
घोषित दरें ऊपर दी हैं, पर असली लागत तीन हिस्सों से बनती है:
- ट्रेडिंग फीस — मेकर और टेकर अलग। लिमिट ऑर्डर आम तौर पर मेकर में गिनते हैं और सस्ते पड़ते हैं।
- फंडिंग — सिर्फ़ फ्यूचर्स पर, और सिर्फ़ तब जब पोज़ीशन खुली रहे। कई दिन की पोज़ीशन पर यह जुड़कर बड़ी रकम बन सकती है।
- निकासी की नेटवर्क फीस — कॉइन और नेटवर्क पर निर्भर।

भारत से इस्तेमाल — क़ानूनी स्थिति और टैक्स
क़ानूनी स्थिति: बायबिट FIU-IND के पास रजिस्टर है और भारतीय उपयोगकर्ताओं को सेवाएँ देता है। जनवरी 2025 में बिना रजिस्ट्रेशन काम करने पर ₹9.27 करोड़ जुर्माना और साइट ब्लॉक हुई थी, फ़रवरी 2025 में रजिस्ट्रेशन हुआ, सितंबर 2025 तक सब बहाल। पूरा ब्योरा और यह कि FIU रजिस्ट्रेशन का मतलब क्या नहीं है — Is Bybit Legal in India में (अंग्रेज़ी में)।
टैक्स, और यही असली लागत है:
- मुनाफ़े पर सीधा 30% (धारा 115BBH), लागत के अलावा कोई कटौती नहीं
- नुक़सान की कोई भरपाई नहीं — न दूसरी आय से, न अगले साल
- ट्रांसफ़र पर 1% TDS (धारा 194S)
ऑफ़शोर वाला पेच: भारतीय एक्सचेंज 1% TDS ख़ुद काटकर विवरण देते हैं। बायबिट जैसे विदेशी एक्सचेंज आम तौर पर नहीं काटते — यानी TDS और 30% टैक्स ख़ुद घोषित करके भरना आपकी ज़िम्मेदारी है (ITR में Schedule VDA)।
किसके लिए ठीक है, किसके लिए नहीं
प्रोडक्ट की गहराई और डेरिवेटिव वॉल्यूम के लिहाज़ से बायबिट बड़े वैश्विक प्लेटफ़ॉर्म में है। पर भारत से इस्तेमाल करते समय चुनाव साफ़ है: INR का सीधा आना-जाना और अपने-आप कटता TDS भारतीय FIU-रजिस्टर्ड एक्सचेंज पर ज़्यादा आसान रहता है, जबकि प्रोडक्ट की गहराई बायबिट पर ज़्यादा है।
अगर आप अभी शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले क्रिप्टो ट्रेडिंग कैसे करें पढ़ें — एक्सचेंज चुनने से पहले यह समझना ज़्यादा ज़रूरी है कि आप कर क्या रहे हैं।
क्रिप्टो में बड़ा जोखिम है और भारत में इस पर भारी टैक्स लगता है। यह सामान्य शैक्षिक जानकारी है — निवेश, टैक्स या क़ानूनी सलाह नहीं। फीस और नियम बदलते रहते हैं, इसलिए मौजूदा जानकारी प्लेटफ़ॉर्म पर ख़ुद जाँचें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
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